गाओ सपने
सावधान
खुला छोड़ दो हमारे हिस्से का आसमान
हम आ रहे हैं
गाने को
अंधेरों का शोकगीत
और करने मुनादी
कि उन्हें पहुँचा दिया है उनके अंजाम तक
नहीं डरेंगे अब
कि दुखों के पेड़ से उतर कर बेताल
आ बैठेगा फिर फिर हमारे कन्धों पर
अब हम
ओढ़ कर धूप
खेलेंगे खुशी
गाएंगे सपने
नाचेंगे ज़िंदगी …ज़िंदगी …ज़िंदगी
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